जब एक अकेले भारतीय सैनिक ने सैकड़ो चीनी सैनिको को घुटने टेकने पर विवश कर दिया

rifle man jaswan singh 1शरीर बेशक मिट जाता हो पर जज्बा हमेशा जीवित रहता है, यह कहावत राइफल मैन जसवंत सिंह रावत पर फिट बैठती है । 1962 के भारत चीन युद्ध में जसवंत सिंह रावत अकेले ही चीनी सैनिको के छक्के छुड़वाने में कामयाब रहे थे । उनकी इस बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से समान्नित किया गया था । जसवंत सिंह जिस पोस्ट पर देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे, उस जगह का नाम भारत सरकार ने जसवंत गढ़ रख दिया है ।

 

राइफल मैन जसवंत सिंह रावत को शहीद हुए बेशक 54 साल बीत चुके है, पर सैनिको को अब भी यकीन है इस जवान की आत्मा आज भी देश की रक्षा कर रही है । सेना के जवानों में ये मान्यता है की शहीद होने के बावजूद राइफल मैन जसवंत सिंह रावत की आत्मा ना सिर्फ सीमा की निगरानी करती है, बल्कि ड्यूटी के समय नींद की झपकी लेने वाले और सुस्त रहने वाले सैनिको को चांटा मार कर सचेत भी रखती है । आपको जानकार ताजजुब होगा शहीद जसवंत सिंह रावत सेना में “बाबा जसवंत” के नाम से प्रसिद्ध है । अरुणाचल प्रदेश में जसवंत गढ़ के नाम से एक स्मारक भी बनाया गया है यह स्मारक सैनिको के लिए किसी धार्मिक स्थल से कम नहीं है । अगले पेज पर देखिए, कैसे अकेले राइफल मैन जसवंत सिंह रावत चीनी सैनिको पर भरी पड़े….

अगले पेज पर देखिए, जसवंत सिंह का ऐसा कारनामा जिससे वो हमेशा हमेशा के लिए अमर हो गए…….

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